
फर्जी नामांतरण से मचा हड़कंप, जांच में घिरे पटवारी को एसडीएम ने किया निलंबित
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 06 जून 2026।मरवाही क्षेत्र में पैतृक भूमि के कथित फर्जी नामांतरण और अवैध विक्रय की साजिश से जुड़े मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पटवारी हल्का नंबर 24 करगीकला के पटवारी रविन्द्र कश्यप को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मरवाही एसडीएम द्वारा जारी इस आदेश के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप की स्थिति बन गई है और पूरे मामले को भूमाफियाओं एवं राजस्व अमले की संभावित मिलीभगत से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार आवेदक सावन सिंह सहित तीन अन्य लोगों ने कलेक्टर के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत कर आरोप लगाया था कि उनकी पैतृक भूमि का फर्जी फौती नामांतरण कर उसे किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज करा दिया गया। इतना ही नहीं, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उक्त भूमि की रजिस्ट्री कराई गई और शेष भूमि को भी बेचने की तैयारी की जा रही थी। मामले को सुनियोजित षड्यंत्र बताते हुए शिकायतकर्ताओं ने इसमें शामिल भूमाफियाओं और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग की थी।
कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त शिकायत के आधार पर मामले की प्रारंभिक जांच कराई गई। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए, जिनमें संबंधित पटवारी की भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाई गई। इसके बाद एसडीएम मरवाही ने तत्काल कार्रवाई करते हुए रविन्द्र कश्यप को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए।जारी आदेश में उल्लेख किया गया है कि संबंधित कर्मचारी का कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया है, जो एक शासकीय सेवक के आचरण के विपरीत है। इसी आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय मरवाही निर्धारित किया गया है तथा उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रदेश में जमीनों के फर्जी नामांतरण और भूमाफियाओं के बढ़ते नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि शिकायतकर्ता समय रहते सामने नहीं आते तो संभवतः उनकी पुश्तैनी जमीन हमेशा के लिए हाथ से निकल जाती।प्रशासन की इस कार्रवाई को राजस्व विभाग में व्याप्त कथित अनियमितताओं पर बड़ी चोट माना जा रहा है। हालांकि अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच केवल पटवारी तक सीमित रहेगी या फिर इस कथित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों, बिचौलियों और भूमाफियाओं के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
फिलहाल, एक पटवारी के निलंबन ने पूरे राजस्व अमले में हलचल मचा दी है और यह मामला आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की ओर बढ़ सकता है।
















